*मुक्त-मुक्तक : 394 - ज़्यादा न सही मैंने माना...............


ज़्यादा न सही मैंने माना 
कम बहुत ही कम ॥
लेकिन है तुझको मुझसे 
जुदाई का कुछ तो ग़म ॥
बेशक़ तू मुस्कुरा ,तू 
खिलखिला ,तू नाच-गा ,
करती हैं ये चुगली तेरी 
आँखें उदास-ओ-नम ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

सिर काटेंगे