*मुक्त-मुक्तक : 392 - ज़रूर पहले मैं उसका.................


ज़रूर पहले मैं उसका 
बड़ा गुमाश्ता रहा ॥
यक़ीन मान अब उससे 
न कोई वास्ता रहा ॥
कभी चला हूँ उसके पीछे 
अंधा बन मैं मगर ,
नहीं रहा वो मेरा अब 
जो उसका रास्ता रहा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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