*मुक्त-मुक्तक : 360 - जब देखो तब दिमाग़..................


जब देखो तब दिमाग़ 
यही करता है सवाल -
क्या इसको ही न बोलेंगे 
हम वक़्त-ए-जवाल ?
पहचानने से करने लगें 
अपने जब मना ,
कुछ ख़ैर-ख़बर लें न 
कभी पूछें हाल-चाल ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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