*मुक्त-मुक्तक : 387 - पलक झपकते भिखारी...............


पलक झपकते भिखारी नवाब हो जाये ॥
सराब जलता हुआ ठंडा आब हो जाये ॥
सुना तो ख़ूब न देखा ये करिश्मा-ए-ख़ुदा ,
कि वो चाहे तो ज़र्रा आफ़्ताब हो जाये ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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