*मुक्त-मुक्तक : 385 - उसके इश्क़ से..................


उसके इश्क़ से बचना चाहे 
पर हो-हो जाये ॥
दिल उसके पुरलुत्फ़ ख़यालों 
में खो-खो जाये ॥
पहले ही कितने सर रो-रो 
बोझ उठाये है ?
तिस पर उसकी वज़्नी-यादें 
भी ढो-ढो जाये ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (25-11-2013) को "उपेक्षा का दंश" (चर्चा मंचःअंक-1441) पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत बहुत धन्यवाद ! मयंक जी !

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