*मुक्त-मुक्तक : 376 - स्मृति में तुम्हारी पड़-पड़ कर...................



स्मृति में तुम्हारी पड़-पड़ कर 
जीवन का भुलक्कड़ बन बैठा ॥
सुख-शांति पूर्ण सुंदर मुख पर 
ज्यों सुदृढ़ मुक्का हन बैठा ॥
मति मारी गई जो न होती मेरी 
तेरी नयन-झील में न डूबता मैं ,
जिसे सब से बचाये रखा था वही 
कर तुझको समर्पित मन बैठा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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