*मुक्त-मुक्तक : 375 - चाहे बस एक बार.........................


चाहे बस 
क बार ही मैंने ॥
ये ख़ता की 
सुधार सी मैंने ॥
मुझको लेना था 
जिसकी जाँ उसपे ,
ज़िंदगी अपनी 
वार दी मैंने ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बहुत ही सुंदर ब्‍लाग और सुंदर रचना।
धन्यवाद ! कहकशाँ खान जी !

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