*मुक्त-मुक्तक : 374 - निकल आई है मेरी.......................


निकल आई है मेरी 
किसलिए रोनी सी सूरत ?
ग़ज़ब हैं वो जो ग़म में 
भी रखें हँसने की क़ुव्वत ॥
ग़ुलामी किसको करती है 
किसी की शाद ख़ुद कहिए ?
हमेशा दर्द ही करता 
रहा मुझपे हुकूमत ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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