*मुक्त-मुक्तक : 373 - न समीप हूँ तेरे मैं न तू.......................


न समीप हूँ तेरे मैं न तू 
सशरीर यों मेरे पास है ॥
इस बात का पर पूर्णतः 
मुझको अटल विश्वास है –
अव्यक्त है वाणी से जो 
व्यवहार से परिलक्षित हो –
तू न माने किन्तु मेरा तेरे 
मन में स्थायी निवास है ।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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