*मुक्त-मुक्तक : 372 - तू रक़्स करे है कि.......................


तू रक़्स करे है कि छटपटाये नचैया ?
गाता है कि रोता है बता मुझको गवैया ?
दुनिया से अलग तेरी ज़िंदगी का किसलिए
है तौर-तरीक़ा अलग , अजब है रवैया ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

वाह ! अजब है रवैया ............बहुत ही उम्दा
धन्यवाद ! अजय कुमार झा जी !
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (15-11-2013) को "आज के बच्चे सयाने हो गये हैं" (चर्चा मंचःअंक-1430) पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
भावो का सुन्दर समायोजन......
बेहद ही उम्दा
धन्यवाद ! Lekhika 'Pari M Shlok' जी !

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