*मुक्त-मुक्तक : 370 - ज़रूर मेरी सोच.................


ज़रूर मेरी सोच 
कुछ अजीब लगती है ॥
ग़लत , फिज़ूल ; किज़्ब 
के क़रीब लगती है ॥
मगर यकीं है कई
 बार हादसों की वजह ,
मुझे नसीब , नसीब 
और नसीब लगती है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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