*मुक्त-मुक्तक : 367 - ये किसकी उसपे......................


ये किसकी उसपे यक-ब-यक पड़ी रे बद निगाह ?
ये किसकी लग गई रे उसको हाय - हाय आह ॥
वो ख़्वाब की तामीर जो हुई ही थी दे के दम ,
बा नामो-निशां दम के दम गिरी हुई तबाह ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Sriram Roy said…
बहुत उम्दा

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