*मुक्त-मुक्तक : 364 - चाहे वो कितने ऊँचे ही......................


चाहे वो कितने ऊँचे ही ब्राह्मण हों या हों आर्य ?
शिक्षक का सुनिश्चित है सबको विद्यादान कार्य ॥
यदि एकलव्य जैसे सभी ठानने लग जाएँ ,
हो जाएँगे औचित्यहीन सारे द्रोणाचार्य ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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