*मुक्त-मुक्तक : 361 - अपनी बदशक़्ली छिपाकर...........................


अपनी बदशक़्ली 
छिपाकर के ख़ुद को पेश करो ॥
क़ाबिले दीद 
बनाकर के ख़ुद को पेश करो ॥
कौन तकता है 
ख़ूबसूरती – ए - रूह यहाँ ?
जिस्म भरपूर 
सजाकर के ख़ुद को पेश करो ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

sk dubey said…
aaha.........very niccccc sir ji

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