*मुक्त-मुक्तक : 358 - चलती गाड़ी के लिए................


चलती गाड़ी के लिए 
लाल सी झंडी होगा ॥
उबलता बर्फ़ ; चाय 
फ़ीकी औ ठंडी होगा ॥
अजनबी है वो मगर 
मुझको लगता चेहरे से ,
उसके जैसा न कोई 
दूजा घमंडी होगा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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