*मुक्त-मुक्तक : 358 - तमाम जद्दोजहद.....................


तमाम जद्दोजहद 
मुश्किलों के बाद मिला ॥
तीखी कड़वाहटों के 
बाद मीठा स्वाद मिला ॥
अपनी तक़्दीर कि लाज़िम 
जो जब भी हमको रहा ,
हमेशा उससे कम ही 
पाया कब ज़ियाद मिला ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Sriram Roy said…
वाह! बहुत ख़ूबसूरत...
सुन्दर प्रस्तुति।
साझा करने के लिए धन्यवाद।
धन्यवाद ! रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी !

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