*मुक्त-मुक्तक : 354 - तेरे क़द के आगे..................


तेरे क़द के आगे ऊँचे-ऊँचे भी बौने ॥
इक तू ही लगता पूरा दूजे औने-पौने ॥
वो शख़्सियत है तू जिसका कोई भी नहीं सानी ,
तू बस शेरे-बब्र और सब बकरी-मृगछौने ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Ghanshyam kumar said…
"वो शख़्सियत है तू जिसका कोई भी नहीं सानी..."
धन्यवाद ! Ghanshyam kumar जी !

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