*मुक्त-मुक्तक : 352 - कैसा पागल.....................


कैसा पागल बादल है 
कहता है प्यासा हूँ ?
क्यों लबरेज़ समंदर बोले 
खाली कासा हूँ ?
किसके खौफ़ से आज बंद हैं 
मुँह बड़बोलों के ?
भारी भरकम टन ख़ुद को 
कहता है माशा हूँ ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Ghanshyam kumar said…
बहुत सुन्दर...

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