*मुक्त-मुक्तक : 349 - सख़्त ख़ल्वत में........................


सख़्त ख़ल्वत में भयानक जले -कटे जैसी ॥
चील सी गिद्ध सी बाज और गरुड़ के जैसी ॥
जबसे महबूब उठा पहलू से मेरे तबसे ,
मैं हूँ नागिन तो रात मुझको नेवले जैसी ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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