*मुक्त-मुक्तक : 348 - जिसका जैसा नसीब..................


जिसका 
जैसा नसीब होता है ॥
उसको 
वैसा नसीब होता है ॥
मुफ़लिसी गर 
लिखी हो क़िस्मत में ,
किसको 
पैसा नसीब होता है ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (26-09-2013) चर्चा- 1380 में "मयंक का कोना" पर भी है!
हिन्दी पखवाड़े की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत बहुत धन्यवाद ! रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी !
धन्यवाद ! कालीपद प्रसाद जी !

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