*मुक्त-मुक्तक : 347 - प्यार के चक्कर में.....................



प्यार के चक्कर में 
बेघरबार होकर ख़ुश रहूँ ॥
मैं हूँ पागल इश्क़ की 
बीमार होकर ख़ुश रहूँ ॥
बज़्म,मजलिस,अंजुमन,
पुरशोर-महफ़िल से जुदा ,
बेज़ुबाँ वीराँ में गुमसुम 
नार होकर ख़ुश रहूँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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