*मुक्त-मुक्तक : 346 - यूँ ही शेरों से.....................


यूँ ही शेरों से नहीं कोई उलझ पड़ता है ?
जिसमें होता है दम-ओ-गुर्दा वही लड़ता है ॥
बज़्म-ए-रावण में कोई लँगड़ा पहुँच जाये मगर ,
पाँव अंगद की तरह कौन जमा अड़ता है ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Ghanshyam kumar said…
वाह... बहुत सुन्दर...

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