*मुक्त-मुक्तक : 343 - न ख़्वाबों में...............


न ख़्वाबों में हक़ीक़त में 
मुलाकातें करेंगे पर......
मेरे सँग दिन-दुपहरी-शाम 
और रातें करेंगे पर.......
किया करते थे जैसे रूठने से
पहले बढ़-बढ़ कर ,
मुझे लगता था वो इक रोज़ 
ख़ुद बातें करेंगे पर.......
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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