*मुक्त-मुक्तक : 341 - वस्ल की जितना हो...................


वस्ल की जितना हो उम्मीद 
कमजकम रखना ॥
हिज्र के बाद भी हँसने का 
दिल में दम रखना ॥
वरना मत भूलकर भी 
राहे इश्क़ में अपनी ,
आँखें दौड़ाना-बिछाना-
लगाना-नम रखना ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

धन्यवाद ! अभिषेक कुमार झा अभी जी !
Shiv Raj Sharma said…
बहुत सुन्दर बहुत सुन्दर
धन्यवाद ! Shiv Raj Sharma जी !

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