*मुक्त-मुक्तक : 335 - रोजी-रोटी न...................


रोजी-रोटी न काम-
धाम की पर्वाह तू कर ॥
फिर न रुसवाई की न 
नाम की पर्वाह तू कर ॥
अपने पाँवों को पर 
बनाने की बस फ़िक्र को रख ,
इश्क़ कीजै तो मत 
मक़ाम की पर्वाह तू कर ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि का लिंक आज बृहस्पतिवार (12-09-2013) को चर्चा - 1366मे "मयंक का कोना" पर भी है!
सादर...!
आप सबको गणेशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत बहुत धन्यवाद ! डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' जी ! मेरी इस रचना को अपने मंच पर स्थान देने के लिए ! आपको भी गणेशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

मुक्त ग़ज़ल : 267 - तोप से बंदूक