*मुक्त-मुक्तक : 334 - इक नहीं खोटा.................


इक नहीं खोटा सभी चोखे दिये हैं ॥
सब ने मिल-जुल कर जो कुछ धोखे दिये हैं ॥
आस्तीनों में जो पाले साँप थे तो ,
मैंने ही डसने के ख़ुद मौक़े दिये हैं ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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