*मुक्त-मुक्तक : 330 - कैसे टूटेगा कोई..............


कैसे टूटेगा कोई हाथ पाँव या सर ?
गोटमार मेले में यदि चले नहीं पत्थर ॥
तर्कहीन और खोखले छोड़ो रीति-रिवाज़ ,
अपनाओ बस लाभ की परम्पराएँ हर ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुती,आभार।
धन्यवाद ! राजेंद्र कुमार जी !

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

कहानी : एक नास्तिक की तीर्थ यात्रा