*मुक्त-मुक्तक : 327 - ऐसा नहीं कि उससे...............


ऐसा नहीं कि उससे मेरा ग़म था कहीं कम ॥
मैं नाचता था वो मनाता रहता था मातम ॥
तक्लीफ़ में ख़ुश रहने का फ़न मुझको था पता ,
वो लुत्फ़ो-मज़ा में भी ढूँढ लेता था इक ग़म ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Pratibha Verma said…
बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।
Suresh Rai said…
आनंद की अनुभूति. बहुत सुन्दर रचना
सुंदर प्रस्तुति,आप को गणेश चतुर्थी पर मेरी हार्दिक शुभकामनायें ,श्री गणेश भगवान से मेरी प्रार्थना है कि वे आप के सम्पुर्ण दु;खों का नाश करें,और अपनी कृपा सदा आप पर बनाये रहें...
धन्यवाद ! Mohan Srivastava Poet जी !

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

मुक्त ग़ज़ल : 267 - तोप से बंदूक