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Friday, August 9, 2013

99 : मुक्त-ग़ज़ल - आजकल बिस्तर पे............


आज कल बिस्तर पे हैं आराम ही आराम है ॥
इंतज़ारे मर्ग है और दूसरा क्या काम है ?
छोड़ दो पीना कहें सब छोड़ दो पीना मगर ,
ये न पूछें वो गटकता जाम पर क्यों जाम है ?
यूँ तो कितनी ही तमन्नाएँ हमारे दिल में हैं ,
जो हमारा हाल है बस एक का अंजाम है ॥
हमने तो दुनिया में कोई काम ऐसा न किया ,
फिर हमें ये मिल रहा किस बात का ईनाम है ?
गर करो इंसाफ़ तो फिर छोड़ दो इस बात को ,
आदमी वह कौन है ? कुछ ख़ास है या आम है ॥
रेग्जिस्तानों में यूँ पानी का रोना मत मचा ,
इस सफ़र में बूँद भी मटका बराबर जाम है ॥
तिश्नगी-ए-शराब क़तरे की भी एक सराब है ,
आदमी पी-पी के उल्टा होता तश्नाकाम है ॥
लोग डर डर के इबादत बंदगी करते वहाँ ,
क्या ख़ुदा गुंडा है दहशतगर्द उनका राम है ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

12 comments:

yashoda agrawal said...

आपने लिखा....हमने पढ़ा....
और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 10/08/2013 को
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

shishirkumar said...

Achhi rachna dhanyabad

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक कल शनिवार (10-08-2013) को “आज कल बिस्तर पे हैं” (शनिवारीय चर्चा मंच-अंकः1333) पर भी होगा!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Mohan Srivastava Poet said...

sundar prastuti

sushila said...

सुन्दर शेर कहे । बधाई आपको !

रश्मि शर्मा said...

बहुत सुदर शेर...बधाई

डॉ. हीरालाल प्रजापति said...

बहुत-बहुत धन्यवाद ! yashoda agrawal जी !

डॉ. हीरालाल प्रजापति said...

धन्यवाद ! shishirkumar जी !

डॉ. हीरालाल प्रजापति said...

बहुत-बहुत धन्यवाद ! रूपचन्द्र शास्त्री ''मयंक'' जी !

डॉ. हीरालाल प्रजापति said...

धन्यवाद ! Mohan Srivastava Poet जी !

डॉ. हीरालाल प्रजापति said...

धन्यवाद ! sushila जी !

डॉ. हीरालाल प्रजापति said...

धन्यवाद ! रश्मि शर्मा जी !