*मुक्त-मुक्तक : 321 - कुछ बस अपने...................

कुछ बस अपने दीन तो कुछ ईमान बदलते हैं ॥
कुछ तो मालिक कुछ अपने भगवान बदलते हैं ॥
पल में लाल हरे पल भर में अपने मतलब को ,
अपना रँग गिरगिट जैसा इंसान बदलते हैं ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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