*मुक्त-मुक्तक : 320 - बेबस बक़ैद आस्माँ...................


बेबस बक़ैद आस्माँ बेकस ज़मीं लगे ॥
औरत उदास ग़मज़दा सा आदमी लगे ॥
बदहाल है आलम तमाम मुल्क़ का यारों ,
अब ये निज़ाम तो बदलना लाज़मी लगे ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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