*मुक्त-मुक्तक : 319 - वो कंकड़ी भी मारें............


वो कंकड़ी भी मारें सर उनके शिला रख दे ॥
इक बुर्ज़ भी छेड़ें तू बुनियाद हिला रख दे ॥
आधी सी भूल पर भी पूरा सबक दे उनको ,
मत बख़्श दुश्मनों को मिट्टी में मिला रख दे ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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