*मुक्त-मुक्तक : 315 - नहीं लिखता है तू...............


नहीं लिखता है तू इक बार लिख मेरी मगर लिखना ॥
ख़ुदा मेरे मेरी तक़दीर दोबारा अगर लिखना ॥
कि जितनी चाय में शक्कर कि आटे में नमक जितना ,
तू बस उतना ही उसमें रंजो-ग़म कम या ज़बर लिखना ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति  

Comments

बहुत ही सुंदर,रक्षा बंधन की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ !
आपको भी शुभकामनाएँ ! धन्यवाद !
Darshan jangra said…
बहुत ही सुंदर,रक्षा बंधन की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ
आपको भी शुभकामनाएँ ! Darshan jangra जी ! धन्यवाद !
Anonymous said…
matlab nahi samjha
आपका पढ़ना ही मेरे लिए सौभाग्य है ! धन्यवाद !

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