*मुक्त-मुक्तक : 314 - जाता नहीं मैं...............


जाता नहीं मैं भूलकर भी 
अब तो वहाँ पे ॥
आती है तेरी बेपनाह 
याद जहाँ पे ॥
वीरान दिल को कैसे फिर 
आबाद करूँ मैं ?
फिर से बसाऊँ बस्ती 
मोहब्बत की कहाँ पे ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Pratibha Verma said…
बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !

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