*मुक्त-मुक्तक : 308 - तक़दीर उड़ाना चाहे..............


तक़दीर उड़ाना चाहे गर मज़ाक़ दोस्तों ॥
सोना भी हो जाता है पल में ख़ाक दोस्तों ॥
सूरज जला न पाये जिसकी ज़ुल्फ़ उसी की ,
हो जाएँ हड्डियाँ बरफ़ से राख़ दोस्तों ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक कल बृहस्पतिवार (15-08-2013) को "जाग उठो हिन्दुस्तानी" (चर्चा मंच-अंकः1238) पर भी होगा!
स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत बहुत धन्यवाद ! रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी !

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