*मुक्त-मुक्तक : 304 - सुई के रूप में.........


सुई के रूप में घातक 
कटार-खंजर था ॥
वो कोई केंचुआ नहीं 
विशाल अजगर था ॥
सब कुछ अपनी अतल 
तहों में डुबो लेता था ,
वो गड्ढा ; गड्ढा नहीं था 
महा-समंदर था ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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