*मुक्त-मुक्तक : 301 - तेरे चेहरे..................


तेरे चेहरे सा दूजा 
चौदहवीं का माहताब ॥
ढूँढ न सकेगा कोई 
लेके हाथ आफ़ताब ॥
तुझसी नाज़नीन तुझसी 
बेहतरीन महजबीन ,
तेरे आगे जन्नत की 
हूरें भी हैं लाजवाब ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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