*मुक्त-मुक्तक : 300 - फ़िक्र का अड्डा...............


फ़िक्र का अड्डा बेचैनी का 
ठाँव जमा था ॥
ग़म की बस्ती दुःख का पूरा 
गाँव जमा था ॥
उस दिन से ही मची थी मुझमें 
अफ़रा तफ़री ,
जिस दिन मेरे दिल में इश्क़ का 
पाँव जमा था ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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