मुक्तक : 298 - एक मांगो तो..............

एक माँगो तो फ़क़त एक कहाँ देते थे ॥
गाँव माँगो तो उठाकर दोजहाँ देते थे ॥
अब ज़माने में रहे दोस्त न पहले वाले ,
हँसते हँसते जो अपने दोस्त को जाँ देते थे ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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