मुक्तक : 296 (B) - हँसती आँखों में...............


हँसती आँखों में हमेशा को 
नमी आ बैठी ॥
जिनमें हर वक़्त चरागां था 
ग़मी आ बैठी ॥
हादसे एक के बाद एक 
इस तरह के हुए ,
समंदरों को भी पानी की 
कमी आ बैठी ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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