मुक्तक : 296 (A) - तूने जो किए मुझपे..........


तूने जो किए मुझपे 
उन अहसानो जब्र में ॥
मेरी अजीम 
बेक़रारियों में सब्र में ॥
कुछ तो है तेरे मेरे
 इश्क़ में कि बेवफ़ा ,
मरकर भी तू ज़िंदा है 
मेरे दिल की क़ब्र में ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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