गोदान,ग़बन,निर्मला................

गोदान ,ग़बन ,निर्मला इत्यादि उपन्यास ॥
जितने थे प्रेमचंद के सारे थे बहुत ख़ास ॥
लिक्खीं थीं जितनी भी कहानियाँ कफ़न तलक ,
आदर्श से यथार्थ के सब ही थीं आस-पास ॥
सब ही थीं आस-पास जो लिक्खा था था क़माल ,
पढ़ने को उन्हे कितनों ने सीखी थी हिन्दी-भाष ॥  
 -डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

मुक्त-ग़ज़ल : 262 - पागल सरीखा

विवाह अभिनंदन पत्र

मुक्त-ग़ज़ल : 264 - पेचोख़म