मुक्तक : 285 - जो गड्ढा है............


जो गड्ढा है वो कुछ करले समंदर बन नहीं सकता ॥
सिपाही चार बित्ते का सिकंदर बन नहीं सकता ॥
उड़े कितनी भी ऊँची बाज से तितली न जीतेगी ,
बहुत उछले मगर मेंढक तो बंदर बन नहीं सकता ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बेहतरीन मुक्तक डॉ. प्रजापति जी
Rajul Mehrotra said…
bahut achcha likhte hai aap
धन्यवाद ! राजेन्द्र सिंह कुँवर ''फरियादी '' जी !
बहुत धन्यवाद ! Rajul Mehrotra जी !
Nice expression of exc. Words.
धन्यवाद ! Harish Kumar Satija जी !

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