मुक्तक : 295 - ऊँछती है मेरे.............


ऊँछती है मेरे बालों को 
अपनी पलकों से ॥
झाड़ती है माँ मेरी धूल 
धुली अलकों से ॥
कैसे हो जाऊँ उसकी आँख से 
ओझल उसको ,
चैन आता है नित्य मेरी 
सतत झलकों से ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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