मुक्तक : 294 - पाँवों के होते.............


पाँवों के होते हाथों से बढ़ना सही नहीं ॥
दुनिया मिटा के जन्नतें गढ़ना सही नहीं ॥
इससे तो ज़मींदोज़ ही रहना मुफ़ीद है ,
यों छत पे आस्मान की चढ़ना सही नहीं ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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