मुक्तक : 293 - जब तक थे..............



जब तक थे तेरे ख़्वाबों 
ख़यालों में खोये से ॥
जागे हुए भी हम थे 
जैसे सोये-सोये से ॥
ठोकर ने तेरी नींद तो 
उड़ा दी मगर हाँ ,
हँसते हुए भी लगते हैं 
अब रोये-रोये से ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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