मुक्तक : 292 - माना वो 'तू'..............


माना वो तू के भी नहीं लायक़ पर आप बोल ॥
बच्चा है फिर भी उसको अपना माई-बाप बोल ॥
गर्दन दबी है तेरी अभी उसके पाँव में ,
बेहतर है उसके पाप अभी मत तू पाप बोल ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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