मुक्तक : 288 - जहाँ पर हार.............


जहाँ पर हार मिलने पर भी ताज़ा हार मिलता है ॥
हिक़ारत की जगह सच्चा दिलासा प्यार मिलता है ॥
यक़ीनन वो जगह जन्नत नहीं तो और क्या होगी ,
जहाँ ज़ख़्मी दिलों को मरहम औ’’ तीमार मिलता है ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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