मुक्तक : 287 - क्या ख़ूब हिमाक़त..........


क्या ख़ूब 
हिमाक़त की हमने ॥
बेशक़ ही ये 
ज़ुर्रत की हमने ॥
इक तरफ़ा औ’’ 
उस पर तुर्रा ये ,
दुश्मन से 
मोहब्बत की हमने ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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