मुक्तक : 286 - बहुत आसानियों..............


बहुत आसानियों से कब 
वो मुश्किल से उतर बैठा
ख़ुद अपने पाँव अपनी ही 
वो मंजिल से उतर बैठा
ख़ुद अपनी ही बदौलत अपनी ही 
कोशिश के ज़रिये वो ,
जो उतरा था कभी दिल में 
तहे दिल से उतर बैठा
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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धन्यवाद ! sanny chauhan जी !.............ज़रूर

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